RTE की अनदेखी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, 10 राज्यों को दी चेतावनी, चार सप्ताह में मांगा जवाब, प्रधान सचिव किए जाएंगे तलब

RTE की अनदेखी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, 10 राज्यों को दी चेतावनी, चार सप्ताह में मांगा जवाब, प्रधान सचिव किए जाएंगे तलब


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गरीब और वंचित बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को लागू नहीं करने पर कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों पर नाराजगी जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 10 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों से पूछा है कि उन्होंने अधिनियम की धारा 12 (1) (सी) को सही तरीके से लागू किया है या नहीं।


कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि चार सप्ताह के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो संबंधित राज्यों के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिवों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। पीठ मोहम्मद इमरान अहमद की ओर से 2023 में दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। धारा 12 (1) (सी) के तहत गैर अल्पसंख्यक निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रवेश स्तर पर कम से कम 25 प्रतिशत सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है।


पंजाब, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में लागू नहीं कानून

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अदालत को बताया कि कई राज्य अब भी इस प्रावधान को लागू नहीं कर रहे हैं। अदालत के समक्ष पेश रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी ने इस प्रावधान को लागू करने से इन्कार किया है। केरलम, मिजोरम और सिक्किम पर ऐसे नियम बनाने का आरोप है जो इस कानून को कमजोर करते हैं। वहीं अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर ने अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट नियम नहीं बनाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।



एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ